अम्बा मोहित देवता त्रिभुवनी आनन्दसंदायिनी।
वेणु पल्लव वाणि वेणु मुरली ज्ञानं प्रियं प्रियं लोचनं।।
सावर्णिउदराज बिम्बवदनं धुम्राक्ष संहारिणीम्।
श्चिदरूपा पर देवता भगवती श्री राजराजेश्वरी।।
उत्तराखण्ड भारतवर्ष के उत्तर दिशा में स्थित है। उत्तराखण्ड जिसका पौराणिक नाम मानसखण्ड भी है । हिमालय की गोद में स्थित, देवताओं की पुण्य भूमि तथा ऋषि-मुनियों की तपस्थली रह चुका यह क्षेत्र अपने आप में साक्षात् देवत्व सिद्ध किया हुआ है।
कण्डारागढ़ रुद्रप्रयाग जिले के सबसे बड़े गांव में से एक
उत्तराखण्ड के बावन गढ़ों में से एक कण्डारागढ़ रूद्रप्रयाग जनपद के अगस्त्यमुनि ब्लॉक में स्थित है। लगभग 400-500 वर्ष पूर्व राजा नरवीर कण्डारी ने यहाँ पर शासन किया था। आज भी उस काल की गुफाएँ, मूर्तियाँ, ताम्रपत्र आदि प्राप्त होते है।
प्रकृति ने इस गाँव को अद्बुत रूप से अपनी गोद में सुशोभित किया है। उत्तराखण्ड के रूद्रप्रयाग जिले में सबसे बड़े गाँव में इस गाँव को द्वितीय स्थान प्राप्त है। इस गाँव में लगभग 700 परिवार निवास करते हैं तथा लगभग 1800 मतदाता हैं। वर्तमान में यहाँ की जनसंख्या लगभग 6,500 है। कण्डारा गाँव की ईष्ट देवी माँ भगवती राजराजेश्वरी है जो कि सम्पूर्ण क्षेत्र की भी कुलदेवी है। यह एक विकासशील गाँव है। विकास की दृष्टि से सभी क्षेत्रों में सम्पन्न एवं परिपूर्ण है।
कण्डारा ग्राम के पूर्व में प्राचीन शिव मन्दिर रंगेश्वर महादेव पश्चिम में नगाधिराज पर्वत हिमालय उत्तर में वीर भैरवनाथ मन्दिर दक्षिण में क्रौंच पर्वत तथा भगवान कार्तिक का मन्दिर स्थित है।
साक्षरता में भी आगे
साक्षरता की दृष्टि से भी यह गाँव अति उत्तम है। वर्तमान में यहाँ की साक्षरता लगभग 90प्रतिशत है। यहाँ के लोग समाज के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में अच्छे-अच्छे पदों पर विराजमान हैं। जैंसे श्री राकेश चन्द्र गैरोला पूर्व उपशिक्षा निदेशक झाँसी मण्डल (उत्तरप्रदेश सरकार), प्रो. प्रताप जंगवाण( प्राचार्य विद्यापीठ गुप्तकाशी), स्व. महेशानन्द गैरोला- जिला विद्यालय रुद्रप्रयाग में निरीक्षक (A.D.बेसिक) एवं मयंक रावत (परमाणु वैज्ञानिक इन्दिरागाँधी परमाणु अनुसन्धान केन्द्र) इत्यादि।
पाण्डव नृत्य और रामलीला के लिए विख्यात
कण्डारा ग्राम में बारह जातियाँ निवास करती है। सभी लोग उदार हृदयी तथा वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना से रहते हैं। यहाँ का पाण्डव नृत्य एवं रामलीला बहुत ही प्रसिद्ध है। यहाँ के रामलीला एवं पाण्डव नृत्य के पात्र देश के अनेक राज्यों में अपनी कला प्रस्तुत कर चुके हैं जिसमें उन्होनें अनेकों उपलब्धियाँ हासिल की है।
यहाँ पर प्रत्येक तीन अथवा पाँच वर्षों के अन्तराल में कुल देवी भगवती माँ राजराजेश्वरी का ढोल-दमऊ के साथ मण्डाण लगाया जाता है। माँ भगवती राजराजेश्वरी कण्डारा गाँव के सभी ग्रामवासियों के घर-घर जाती हैं तथा पूरे परिवार का कुशलक्षेम पूछकर उन्हे अपना आशीर्वाद प्रदान करती हैं। इस समय यहाँ दूर-दराज के अन्य क्षेत्रों के श्रद्धालुगण आकर माँ भगवती राजराजेश्वरी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
धन्यवाद।।
आचार्य सुमित गैरोला जिला प्रमुख
उत्तराखण्ड गढ़कुमाऊँ क्षेत्रीय संगठन

बहुत सुंदर, अगर वाकई उत्तराखंड के पहाड़ी छेत्रो को पलायन से मुक्त करना हैँ, तो हमें हर गाँव को कंडारा गाँव की तरह ही विकसित करना होगा. जहाँ पर पढ़ाई का उच्च स्तर हो, स्वास्थ्य सेवाये बेहतर हो, और हर वर्ग के लिए रोजगार हो. 🌹🌹
ReplyDeleteसही कहा आपने ����
Deleteइस गाँव के लोगों की एक खास बात और है इस गाँव के लोगो की एकजुटता । कोई भी कार्य हो यहाँ के लोग हर समय तत्पर रहते हैं ।
यहा की जलवायु पूरे क्षेत्र में सर्वोत्तम है और यहां पर खेलकूद के लिये एक स्टेडियम भी बना है जो ब्रह्म स्टेडियम कण्डारा के नाम से जाना जाता है जहाँ पर समय समय पर क्रिकेट टूर्नामेंट होते रह्ते हैं । श्री राजराजेश्वरी माता जी के मंदिर से इस गाँव की खूबसूरती का नज़ारा ही कुछ अलग है ।
ReplyDeleteयहा की जलवायु पूरे क्षेत्र में सर्वोत्तम है और यहां पर खेलकूद के लिये एक स्टेडियम भी बना है जो ब्रह्म स्टेडियम कण्डारा के नाम से जाना जाता है जहाँ पर समय समय पर क्रिकेट टूर्नामेंट होते रह्ते हैं । श्री राजराजेश्वरी माता जी के मंदिर से इस गाँव की खूबसूरती का नज़ारा ही कुछ अलग है ।
ReplyDeleteप्रदीप नेगी विष्णुपुर कण्ड़ारा
बहुत बहुत आभार भेजी।🙏
Deleteबहुत ही खूबसूरत गांव है ❤❤❤
ReplyDeleteजी बिलकुल सही कहा आपने राजरजेस्वरी मंदिर से यहां का नजारा तो स्वर्ग के समान लगता है यह अपना उत्तरा खंड का बहुत ही सुंदर गांवो मैं से एक है।
ReplyDeleteआप सभी अपने-अपने क्षेत्र की खूबियां संगठन के माध्यम से सभी लोगों तक पंहुचा सकते हैं। 💐💐
ReplyDeleteभौत सुन्दर जय मां राजराजेश्वरी
ReplyDeleteआचार्य जी आप जिला प्रमुख कब बनें ? लेकिन बहुत सही बात लिखी है ।
ReplyDeleteNice.
ReplyDeleteBahut hi badiya jai rajrajeswri
ReplyDeleteअति उत्तम।। आज उत्तराखंड के ज्यादातर गांव पलायन, अशिक्षा, बेरोजगारी की मार झेल रहे है।यह क्षेत्र उदाहरण है कि यदि क्षेत्र के लोगो मे सजगता हो तो कुछ भी असम्भव नहीं है।
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